MP News: मध्य प्रदेश के गुना शहर के लिए एक बड़ा बदलाव दरवाजे पर खड़ा है। नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा मिलने की प्रक्रिया तेज़ हो चुकी है, और साथ में 32 गांवों को भी जोड़ा जा रहा है। ये सिर्फ नक्शे की रेखाएं नहीं बदलेंगी, बल्कि लाखों लोगों की ज़िंदगी और शहर की दिशा दोनों बदलने वाली हैं। अब सबकी नजर एक ही सवाल पर टिकी है क्या गुना वाकई शहरी विकास का नया चेहरा बन पाएगा?
नगर निगम बनने की प्रक्रिया में आया तेज़ मोड़
गुना नगर पालिका को नगर निगम बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन अब सरकार के पास कलेक्टर ऑफिस से एक संशोधित और विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव में गुना के आसपास के 32 गांवों को नगर निगम सीमा में जोड़ने की सिफारिश की गई है। अगर राज्यपाल की अनुमति मिल जाती है, तो गुना आधिकारिक रूप से नगर निगम बन जाएगा।
ये सभी गांव होंगे नए शहर का हिस्सा
प्रस्ताव के अनुसार जो गांव नगर निगम में शामिल किए जा सकते हैं, उनमें खेजरा, पीताखेड़ी, बजरंगगढ़, सौंजना, शाहपुर, बमौरी बुजुर्ग, गणेशपुरा, गिद खोह और हिलगना जैसे नाम शामिल हैं।
2011 की जनगणना में इन गांवों की कुल आबादी 43,661 थी, और अब अनुमानित जनसंख्या 60 हजार से भी अधिक हो चुकी है। जब इन गांवों को नगरपालिका की मौजूदा आबादी से जोड़ा जाएगा, तो कुल संख्या 4 लाख से ऊपर पहुंच जाएगी, जो नगर निगम बनने की पात्रता के लिए आवश्यक है।
विधायक की मांग को नहीं मिली तवज्जो
भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य की मांग थी कि हरिपुर गांव को भी निगम सीमा में शामिल किया जाए। लेकिन प्रशासन ने इसे ठुकरा दिया और इसके स्थान पर हरीपुरा गांव को शामिल करने का निर्णय लिया गया।
यह फैसला पूरी तरह से भूगोल और नक्शे के अनुसार लिया गया है, न कि राजनीतिक दबाव में।
नगर निगम बनने से क्या बदल जाएगा विकास
नगर निगम बनने का सबसे सीधा असर शहर के विकास पर पड़ेगा। अब तक जो योजनाएं कागजों में सिमटी रहती थीं, उन्हें ज़मीन पर लाने के लिए फंडिंग, योजना और क्रियान्वयन की रफ्तार बढ़ेगी।
गांवों को शहरी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी जैसे- पक्की सड़कें, नियमित सफाई, ड्रेनेज सिस्टम, स्ट्रीट लाइट, पानी की सप्लाई और डिजिटल सुविधाएं। सबसे बड़ी बात, सरकार सीधे बजट आवंटित कर सकेगी और योजनाएं केंद्र व राज्य दोनों स्तरों से आ सकेंगी।
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देखें कैसे पूरा होगा यह परिवर्तन
इस प्रक्रिया में सबसे पहले उन सभी ग्राम पंचायतों से संकल्प पारित करवाया जाएगा जिन्हें शामिल किया जा रहा है।
इसके बाद आम जनता से दावे और आपत्तियां मांगी जाएंगी। आखिरी प्रस्ताव राज्य सरकार की कैबिनेट में पास होने के बाद राज्यपाल को भेजा जाएगा। राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी होगा और गुना आधिकारिक रूप से नगर निगम बन जाएगा।
गुना शहर और आसपास के गांवों में इस खबर को लेकर चर्चा जोरों पर है। कई लोगों को उम्मीद है कि नगर निगम बनने के बाद उनकी समस्याएं हल होंगी और मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचेगीं। हालांकि कुछ लोग आशंकित भी हैं कि क्या वाकई योजनाएं पूरी होंगी या सिर्फ कागज़ों में ही रह जाएंगी?
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व्यापारी वर्ग इसे गुना के आर्थिक विकास का बड़ा मौका मान रहे हैं, तो युवा इसे रोजगार और अवसरों के नए द्वार की तरह देख रहे हैं। लेखक के तौर पर मेरा मानना है कि अगर यह निर्णय नीयत और नीति दोनों में साफ हो, तो गुना वाकई ‘मिनी मेट्रो’ की दिशा में पहला मजबूत कदम रख सकता है।

